Thursday, 13 March 2014

तुम आ जाओ (गीत/Nazm)

आज ईक बार, फिर से, तुम आ जाओ 
फिर वही, मधुर बोली, तुम सुना जाओ
.
सुकूँ की नींद, सोने की, है हसरत जागी
मिलन की आस, फिर मन को, है लागी
आ जाओ, तुम सारे, बंधन को तोड़कर 
न आ सको, तो ख्वाबों में, ही आ जाओ
.
आज ईक बार, फिर से, तुम आ जाओ 
फिर वही, मधुर बोली, तुम सुना जाओ
.
वो लड़कपन से, भरी तुम्हारी, सभी बातें
छुप-छुपा के, तुमसे की, हुयी मुलाक़ातें 
आज अँधेरों में, डूबी हैं, तमाम गलियां
फिर यही हसरत, चराग़, तुम जला जाओ
.
आज ईक बार, फिर से, तुम आ जाओ 
फिर वही, मधुर बोली, तुम सुना जाओ 
.
इस तरह रूठना, अच्छा, नहीं होता है
साक़ी तुझ में, डूबने का, दिल करता है
अब, इस तरह तुम, सितमरानी न बनो
बनके मेरी, ख्वाबों की, रानी आ जाओ
.
आज ईक बार, फिर से, तुम आ जाओ 
फिर वही, मधुर बोली, तुम सुना जाओ
--अभिषेक कुमार ''अभी''



Aaj ik baar, fir se, tum aa jaao.
Fir whi, madhur boli, tum suna hao.
.
Sukun ki nind sone ki hai hsrat jagi
Milan ki aas fir man ko hai laagi
Aa jao tum saare bandhan ko todkar
N aa sako to khwabo me hi aa jaao
.
Aaj ik baar, fir se, tum aa jaao.
Fir whi, madhur boli, tum suna hao.
.
Wo ladkpan se, bahri tumhari, sabhi baaten
Chhup-chhupa ke, tumse ki, huyi mulaqaten
Aaj andheron me, doobi hain, tamam gliyan
Fir yahee hasarat, charaag tum, jalaa jaao
.
Aaj ik baar, fir se, tum aa jaao.
Fir whi, madhur boli, tum suna hao.
.
Is tarah roothna achchha nahi hota
Saki tujh me doobne ka dil karta hai
Ab is tarah tum sitamraani na bano
Banke meri khwabon ki raani aa jao
.
Aaj ik baar, fir se, tum aa jaao.
Fir whi, madhur boli, tum suna hao.
--Abhishek Kumar ''Abhi''

20 comments:

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    1. हृदय के अंतःकरण से आदरणीय राजीव सर आपका धन्यवाद

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  2. बहुत भावपूर्ण रचना....

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    1. हृदय के अंतःकरण से आदरणीय कैलाश सर आपका धन्यवाद

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (14-03-2014) को "रंगों की बरसात लिए होली आई है" (चर्चा अंक-1551) में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आदरणीय सर, इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु
      तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

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  4. आपकी लिखी रचना शनिवार 15 मार्च 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. आदरणीय यशोदा, जी इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु
      तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

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  5. बहुत खूबसूरत रचना....

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    1. इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु , तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

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  6. भावपूर्ण रचना के लिए बधाई |

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    1. आदरणीय, इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु
      तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

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  7. बहुत खूबसूरत एवँ नाज़ुक अहसासों को समेटे खूबसूरत रचना ! होली की हार्दिक शुभकामनायें !

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    1. आदरणीय, इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु
      तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

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  8. बहुत सुन्दर ...

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    1. आदरणीय उपासना जी, आपका हार्दिक आभारी हूँ।

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  9. आज अँधेरों में, डूबी हैं, तमाम गलियां
    फिर यही हसरत, चराग़, तुम जला जाओ
    सुन्दर नज़्म
    .

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    1. आपका हार्दिक आभार की इस विरह अभिव्यक्ति के साथ आत्मसाध्य हुए और सराहना प्रदान की।
      सादर

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