Sunday, 30 March 2014

मार डाला हमें जग हँसाई ने

प्यार को खेल तुमने समझ लिया है
इसलिए आज रुस्वा हमें किया है

रह्'मतों से ख़ुदा की मिले मुहब्बत
ये रिवायत है तुमने बदल दिया है

मार डाला हमें जग हँसाई ने अब
हर सुबह शाम हमने ज़हर पिया है

इस शहर में मिलेंगे बहुत ही ऐसे
मार के ख़ुद को जिसने यहाँ जिया है

सांस लेना ही ज़िंदा नहीं है रहना
देख आलम लगे ये सभी रिया है

हाल तुझसे कहूँ क्या बता ख़ुदाया
माज़रा देख मुँह को 'अभी' सिया है
-अभिषेक कुमार ''अभी''
(रिया=नुमाइश/दिखावा)
(फाइलुन/फाइलुन/फाइलुन/फऊलुन)


Pyar ko khel tumne samjh liya hai
Isliye aaj, ruswaa, hamen kiya hai

Rahmto se khuda ki mile muhbbat
Ye riwayt ko, tumne, bdal diya hai

Maar dala hmen, jag hansaai ne ab
Hr subah sham hmne zhar piya hai

Is shahar me milenge bahut hi aise
Mar ke khud ko jisne yahan jiya hai

Sans lena hi, zinda, nahi hai rhnaa
Dekh aalam, lge, ye sabhi riya hai

Hal tujhse k'hun kya, bta khudaya
Mazra dekh munh ko 'abhi' siya hai
--Abhishek Kumar ''Abhi''
(Riya=Numaish/Dikhawa)

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (01-04-2014) को "स्वप्न का संसार बन कर क्या करूँ" (चर्चा मंच-1562)"बुरा लगता हो तो चर्चा मंच पर आपकी पोस्ट का लिंक नहीं देंगे" (चर्चा मंच-1569) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नवसम्वत्सर और चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
    परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. 'मार डाला हमें जग हंसाई ने' बेहतरीन गज़ल ,एक से बढ़के एक शैर कहे हैं :

    प्यार को खेल तुमने समझ लिया है
    इसलिए आज रुस्वा हमें किया है

    रह्'मतों से ख़ुदा की मिले मुहब्बत
    ये रिवायत है तुमने बदल दिया है

    मार डाला हमें जग हँसाई ने अब
    हर सुबह शाम हमने ज़हर पिया है

    इस शहर में मिलेंगे बहुत ही ऐसे
    मार के ख़ुद को जिसने यहाँ जिया है

    सांस लेना ही ज़िंदा नहीं है रहना
    देख आलम लगे ये सभी रिया है

    हाल तुझसे कहूँ क्या बता ख़ुदाया
    माज़रा देख मुँह को 'अभी' सिया है
    -अभिषेक कुमार ''अभी''
    (रिया=नुमाइश/दिखावा)
    (फाइलुन/फाइलुन/फाइलुन/फऊलुन)

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  3. बंधू अपने ब्लॉग से आप तक नहीं पहुँच पाता हूँ इसीलिए कैन और से आता हूँ कुछ तकनीकी अड़चन है आपके यहाँ से ?

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  4. प्यार को खेल तुमने समझ लिया है
    इसलिए आज रुस्वा हमें किया है

    .....वाह क्या बात है बहुत सुंदर शब्दावली

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  5. खूबसूरत ग़ज़ल...मुबारकबाद…

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  6. बहुत बढ़िया रचना व बेहतरीन शब्द , धन्यवाद अभिषेक भाई !
    नवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ त्याग में आनंद ~ ) - { Inspiring stories part - 4 }

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  7. सांस लेना ही ज़िंदा नहीं है रहना
    देख आलम लगे ये सभी रिया है
    ....वाह...बहुत उम्दा अशआर....बेहतरीन ग़ज़ल...

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  8. मार डाला हमें जग हँसाई ने अब
    हर सुबह शाम हमने ज़हर पिया है.........बहुत बढ़िया

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  9. इस शहर में मिलेंगे बहुत ही ऐसे
    मार के ख़ुद को जिसने यहाँ जिया है.......
    wah-wah......!!!!

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