Thursday, 27 February 2014

मिले तज़ुर्बा जो दुनियाँ से/Mile tazurba jo duniya se

देश के चंद, सियारों से, बचके रहना भाई
आज यही तो लूटते हैं, अपना गहना भाई

देखभाल के ही हमेशा, इस दुनियाँ में चलना,
सफ़ेद लिबास काले लोग ने, है पहना भाई

जिसको पालो पोशो आज, वही दिखाये आँखें,
बच्चों का हर ज़ुल्म बाप को, पड़े सहना भाई

लाख़ दुखों के ढ़हे पहाड़, फ़िर भी ज़िंदा रहना,
नदी धार को हर हाल में, पड़ता बहना भाई

झूठ फ़रेब माया के, चक्कर में कभी न आना,
सच सुनना औ सदा सच ही मेरे कहना भाई

मिले तज़ुर्बा जो दुनियाँ से,'अभी' वही है कहता,
मानवता के दुश्मन संग, कभी न रहना भाई
--अभिषेक कुमार झा ''अभी''



Desh ke chand siyaron se, bachke rhna bhai
Aaj yahi to loot'te hain, apna gahnaa bhai.

Dekhbhal ke hi hamesha, is duniya me chlna
Safed libaas kale logon ne, hai pahnaa bhai

Jisko palo posho aaj, wahi dikhaye aankhen
Bachchon ka hr zulm bap ko, pde sahna bhai

Lakh dukhon ke dh'he p'had, fir bhi zinda rhna
Nadi dhar ko hr haal me, padta bahnaa bhai

Jhooth freb maya ke, chakkar me kabhi n aana
Sach sun'na or sadaa sach hi, mere kahnaa bhai

Mile tazurba jo duniya se 'abhi' wahi hai kahta
Manvta ke dushman sang, kabhi n rahnaa bhai.
--Abhishek Kumar ''Abhi''

14 comments:

  1. मिले तज़ुर्बा जो दुनियाँ से,'अभी' वही है कहता,
    मानवता के दुश्मन संग, कभी न रहना भाई
    अत्यंत सुन्दर अभिव्यक्ति

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया दीदी आपका।

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  2. आपने देश के हालात का अच्छा तजुर्बा पेश किया है।
    यहाँ आता रहूँगा, पढ़ता रहूँगा।

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई और समर्थन हेतु।
      आप यहाँ आते रहें और अपने विचार से कृतार्थ करते रहें, ऐसा ही मैं भी चाहता हूँ।
      सादर

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  3. देश के चंद, सियारों से, बचके रहना भाई
    आज यही तो लूटते हैं, अपना गहना भाई
    bahut sunder bade bhai,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,samyik paridrisya.

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई और समर्थन हेतु।
      आप यहाँ आते रहें और अपने विचार से कृतार्थ करते रहें, ऐसा ही मैं भी चाहता हूँ।
      सादर

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  4. Replies
    1. आपका हार्दिक धन्यवाद

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  5. अत्यंत सुन्दर अभिव्यक्ति....और साथ ही में सुंदर ब्लॉग के लिए बधाई

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई और समर्थन हेतु।
      आप यहाँ आते रहें और अपने विचार से कृतार्थ करते रहें, ऐसा ही मैं भी चाहता हूँ।
      सादर

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (11-03-2014) को "सैलाव विचारों का" (चर्चा मंच-1548) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु।
      आप यहाँ आते रहें और अपने विचार से कृतार्थ करते रहें, ऐसा ही मैं चाहता हूँ।
      सादर

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  7. जिसको पालो पोशो आज, वही दिखाये आँखें,
    बच्चों का हर ज़ुल्म बाप को, पड़े सहना भाई
    hmmmmmmmm............bilkul saty vachan......

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु।
      आप यहाँ आते रहें और अपने विचार से कृतार्थ करते रहें, ऐसा ही मैं चाहता हूँ।
      सादर

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