Wednesday, 26 February 2014

क़िस्मत ने खेला खेल/Kismat ne khela khel



प्यार के अल्फ़ाज़ सब बेईमानी हो गए हैं
रिश्ते बनाके लोग अब मनमानी हो गए हैं

अल्लाह ने रहमतों से नवाज़ा है ज़िंदगी को
आज पाके ज़िन्दगी सभी गुमानी हो गए हैं

लूट की कमाई से भर लिया जिन्होंने घर को
दुनियाँ में देखो उनको ख़ानदानी हो गए हैं

गोरों की क़ैद से हम सब आज़ाद हो गए हैं
अपनों के बीच आज हम ज़िंदानी हो गए हैं

अफ़साना लिखने हम किसी और का चले थे
क़िस्मत ने खेला खेल ख़ुद कहानी हो गए हैं
--अभिषेक कुमार ''अभी''

Pyaar ke alfaz sab beimani ho gye hain
Rishte bnake log ab manmani ho gye hain

Allah ne rahmton se nawaza hai zindgi ko
Aaj pake zindgi sabhi gumani ho gye hain

Loot ki kamai se bhar liya jinhone ghar ko
Duniya me dekho unko khandani ho gye hain

Goron ki kaid se ham sab aazad ho gye hain
Apno ke beech aaj ham zindani ho gye hain

Afsana likhne ham kisi or ka chale the
Kismat ne khela khel khud kahani ho gye hain.
—Abhishek Kumar ''Abhi''

12 comments:

  1. bhuat sundar !
    shubhkaanaayen bhai abhi !
    haan.. kitaab jo laaye ho mele se jab padh le to mujhe apne ghar chai par jaroor bula lena.. :)

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    1. आप के उत्साहवर्धक शब्द मेरी अभिव्यक्ति के लिए बहुत ज़रूरी है।
      कृपया ये साथ बनाये रखें।
      सादर

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  2. वाह...सुन्दर प्रस्तुति।
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    1. आप के उत्साहवर्धक शब्द मेरी अभिव्यक्ति के लिए बहुत ज़रूरी है।
      कृपया ये साथ बनाये रखें।
      सादर

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  3. Replies
    1. Sammanit Akhilesh Ji, Saadar Aabhar.
      Aap Google+ Pe To Jud Hi Gye Hain, Kripa Karke Is Blog Se Bhi Jud Jayen.(Join This Site Se)
      Aabhar

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    2. Bahut hi behter aapne likha..very nice. ..

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  4. खूब लिखो, अच्छा लिखो, आगे बढ़ो.

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    1. आपके इस अनमोल आशीष हेतु आपका कृतग्य हूँ आदरणीय

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