Friday, 22 August 2014

हम भी अब नेता बनेंगे !

एक था 'रामबुधन्वा', बेरोज़गार गाँव का नौजवान। 
एक दिन उसके गाँव में आ गए नेता जी। नेता जी के ठाठ-बाठ देखकर रामबुधन्वा भौंचक्का हो गया। नेता जी भी एक दम से चमचमाती बी.ऍम.डब्लू कार से उतरे, एक दम सफ़ेद चक्का-चक लिबास में, हाथ में दो ठो मुआइल लिए, लेफ़्ट और राइट में दो सुन्दर कन्या के हाथ में फ़ाइल और उसके पीछे, ये छः छः फ़ीट के दो गो जवान, एकदम काले लिबास में, आँखों पे चश्मा लगाए, हाथ में हथियार लिए। 
जैसे ही, रामबुधन्वा पहुँचा नेता जी से मिलने, कि तपाक से वो दोनों अंगरक्षक ने आगे बढ़कर रोक दिया, रामबुधन्वा भी ताव में आ गया, क्यूंकि वो नेता कोई और नहीं, उसका दोस्त था। जो गाँव में साथ पढ़ता था, फिर एक बार एकाएक गायब हो गया। रामबुधन्वा और दोनों अंगरक्षक में जोड़-जबरदस्ती होने लगी, तो उसने रामबुधन्वा को दे दिया धक्का। अब रामबुधन्वा गया गिर, बेचारे को चोट भी तेज़ लग गयी। 
पर किसी को क्या फ़र्क पड़ता है। नेता जी और उनका लाव-लश्कर आगे निकल गया और रामबुधन्वा वहाँ से उठकर घर की ओर निकल गया।

शाम हुई, खाने पे बैठा रामबुधन्वा अपने में ही खोया-खोया सा था, तो उसके पिता ने पूछा '' के हुआ रे तोहरे के ?''
रामबुधन्वा, नज़रें नीची करके बोला हम भी अब नेता बनेंगे !
रामबुधन्वा के घर सब लोग एक साथ हँसने लगे। हँस काहे रहे हो, हम सच कह रहे हैं, हम भी अब नेता बनेंगे !
इसपर उसके पिता ने कहा, ठीक है, अभी खाना खा कल नेता बनयो। 

अब रामबुधन्वा को रात भर नींद आई नहीं, सुबह उठते ही, पिता से बोला, हमखे बता बsss कि कैसे नेता बने ?
इस पर बड़े प्यार से पिता ने कहा, एक बात बता

- कभी किसी की हत्या की है ?
- नहीं ! पिता जी  
- कभी किसी के साथ बलात्कार ?
- छिः छिः कैसी बात पूछ रहे हैं आप 
- अच्छा चोरी की है ?
- नहीं तो 
- अच्छा किसी लड़की को तो छेड़ा ही होगा 
- नाहि ! हम अइसन नाहि हैं 
- अच्छा, गाँव वाले तो तेरे से डरते होंगे !
- अर्रे, कैसे डरेंगे हम तो सबसे प्यार से पेश आते हैं
- अच्छा अब अंतिम प्रश्न, कभी कोर्ट/कचहरी या हवालात गया है ?
- पिताजी आप भी कमाल कर रहे हैं, जब हमने ऐसा कोई गलत काम कभी किया ही नहीं है, तो काहे जायेंगे वो नरक में !

तो, मेरा भोला बेटा अब सुन, तू अपने सर से ये नेता बनने का भूत जल्दी उतार ले, तू नेता क्या उसका चपरासी भी नहीं बन सकता और अगर कोई काम नहीं मिल रहा है, तो खेती कर, भैंस पाल। क्यूंकि नेता बनने के लिए, ये सब ज़रूरी है। जो तूने कभी किया नहीं, और ना ही कभी कर सकता है। 
-अभिषेक कुमार ''अभी''

10 comments:

  1. बहुत सटीक कटाक्ष...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (23-08-2014) को "चालें ये सियासत चलती है" (चर्चा मंच 1714) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सही कहा !! मंगलकामनाएं अभिषेक !!

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  4. वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।बधाई बन्धु।

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  5. अरे वाह बहुत सुन्दर और साथ में कोयला खाने का अभ्यास भी होना चाहिए .चारा पचाना आना चाहिए

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  6. बहुत बढ़िया।।

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