Wednesday, 30 July 2014

वास्ता रखते नहीं थे/Wasta rakhte nahi the

बहुत गुमसुम हो ऐसे तुम कभी रहते नहीं थे 
कभी हमसे ख़फ़ा होके कहीं टिकते नहीं थे

जरा सी बात क्या कह दी कि रिश्ता तोड़ बैठे
मेरी आवाज़ सुने जो बिन रहा करते नहीं थे

सफ़र के बीच में यूँ साथ क्यूँ छोड़ा है तुमने
कहीं जो बिन हमारे साथ के चलते नहीं थे

अदावत ये है कैसी जो निभा तुम अब रहे हो
मुहब्बत की क़सम खाते जो तुम थकते नहीं थे

जहाँ को छोड़ जिनके भाग हम पीछे रहे थे
'अभी' हमसे कभी वो वास्ता रखते नहीं थे
-अभिषेक कुमार ''अभी''
Bahut gumsum ho aise tum kabhi rahte nahi the
Kabhi hmse khfaa hoke kahin tikte nahi the

Jara si baat kya kah di ki rishta tod baithe
Meri aawaz sune jo bin rha karte nahi the

Safar ke beech me yun saath kyun chhoda hai tumne
Kahin jo bin hmare saath ke chalte nahi the

Adawat ye hai kaisi jo nibha tum ab rhe ho
Muhbbat ki kasam khate jo tum thakte nahi the

Jahn ko chhod jinke bhag hm pichhe rhe the
'Abhi' hmse kabhi wo wasta rakhte nahi the
-Abhishek Kumar ''Abhi''

9 comments:

  1. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

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  2. सफ़र के बीच में यूँ साथ क्यूँ छोड़ा है तुमने
    कहीं जो बिन हमारे साथ के चलते नहीं थे.............bahut sundar

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  3. आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 1 . 8 . 2014 दिन शुक्रवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  4. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल !
    नई पोस्ट माँ है धरती !

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  5. बहुत सुन्दर

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  6. अदावत ये है कैसी जो निभा तुम अब रहे हो
    मुहब्बत की क़सम खाते जो तुम थकते नहीं थे
    बहुत खूबसूरत गजल.

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  7. सफ़र के बीच में यूँ साथ क्यूँ छोड़ा है तुमने
    कहीं जो बिन हमारे साथ के चलते नहीं थे
    ...........गज़ब के शेरों से सजी लाजवाब गज़ल .

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