Sunday, 5 October 2014

हौसला है हम में कितना/Hausla hai hm me kitna

हौसला है हम में कितना वक़्त पे ये दिखाएँगे
हम अभी से क्या बताएँ वक़्त पे ही बताएँगे

लाख कर ले तू जतन पर क्या हमारा बिगाड़ेगा,
ठान ली हमने भी क़िस्मत अब ख़ुदी से बनाएँगे

ख़ूब देखे घूम हमने साथ अब तक ही तेरे हैं  
आ गई अब अक़्ल हम में कारवाँ बनते जाएँगे

चाँद जैसे घट के आता अपने पूर्ण निखार पे
हम भी गिरते और संभलते अवश्य जग मगाएँगे

क़द अभी छोटा मगर है कल गगन मुठ्ठी में होगा
जब हिमालय भर के सूरज अपने मन में जगाएँगे
-अभिषेक कुमार "अभी"
Hausla hai hm me kitna waqt pe ye dikhayenge.
Hm abhi se kyaa btaayen waqt pe hi btaayenge.

Lakh kar le tu jatn par kyaa hmaara bigaadega,
Than li hmne bhi kismat ab khudi se bnayenge.

Khoob dekhe ghum hmne sath ab tak hi tere hain,
Aa gayi ab akl hm me kaarwaan bante jaayenge.

Chand jaise ghat ke aata apne poorn nikhar pe,
Hm bhi girate or sambhlte awashy jag mgayenge.

Qd abhi chhota mgr hai kl gagan muththi me hoga,
Jab himalay Bhr ke sooraj apne man me jagaayenge.
-Abhishek Kumar ''Abhi''

7 comments:

  1. आपकी रचना तो हौसलों से भरपूर है ,अति सुन्दर

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  2. सुन्दर प्रेरणादायक प्रस्तुति......दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं! मेरी नयी रचना के लिए http://prabhatshare.blogspot.in/ पर सादर आमंत्रित है!

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  3. बहुत सुन्दर रचना भाई।

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  4. बहुत सुन्दर रचना भाई।

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  5. सुंदर। नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ, सादर।

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  6. सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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